लालबागचा राजा 2025: 50 फीट भव्य दरबार में विराजमान, तिरुपति बालाजी से प्रेरित सजावट और गंगा-जमुनी एकता का संदेश

लालबागचा राजा 2025 इस बार 50 फीट ऊंचे भव्य दरबार में विराजमान हुए हैं। पंडाल तिरुपति बालाजी से प्रेरित है और मुस्लिम कारीगरों द्वारा तैयार किया गया पर्दा हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बना।

लालबागचा राजा 2025: 50 फीट भव्य दरबार में विराजमान, तिरुपति बालाजी से प्रेरित सजावट और गंगा-जमुनी एकता का संदेश
लालबागचा राजा

मुंबई की शान माने जाने वाले लालबागचा राजा इस साल भक्तों के लिए एक नए रूप में सजाए गए हैं। गणेश चतुर्थी 2025 पर बप्पा को एक विशाल और भव्य 50 फीट ऊंचे दरबार में विराजमान किया गया है। इतनी ऊंचाई से भक्तों को बप्पा के दर्शन और भी दिव्य और मनमोहक अनुभव देंगे।

तिरुपति बालाजी के स्वर्ण मुकुट से प्रेरित पंडाल
इस बार लालबागचा राजा का पंडाल पूरी तरह तिरुपति बालाजी के स्वर्ण मुकुट से प्रेरित होकर सजाया गया है। मूर्ति को सोने के गहनों और आभूषणों से अलंकृत किया गया है। पूरे पंडाल की भव्यता भक्तों को ऐसा अनुभव कराएगी मानो वे किसी स्वर्णिम महल में प्रवेश कर रहे हों।

50 फीट ऊंचे मखमली पर्दे से हुई पहली झलक
लालबागचा राजा की मूर्ति के अनावरण से पहले, उनके सामने 50 फीट ऊंचा और चौड़ा मखमली पर्दा लगाया गया था। भक्तों की बेसब्री तब शांत हुई जब यह पर्दा हटाकर बप्पा के दर्शन कराए गए।

हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
इस साल का सबसे खास पहलू यह है कि यह मखमली पर्दा उत्तर प्रदेश के मुस्लिम कारीगरों द्वारा तैयार किया गया। खान चाचा और उनकी टीम ने चार दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसे बनाया। इस पहल ने एक मजबूत संदेश दिया है कि भक्ति और आस्था की कोई जाति या धर्म नहीं होता। यह दृश्य केवल एक सजावट नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सद्भावना का प्रतीक है।

गणेश चतुर्थी पर शुरुआत होगी दर्शन की
लालबागचा राजा के दर्शन गणेश चतुर्थी के पहले दिन बुधवार से आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। लाखों श्रद्धालु इस भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में बप्पा के दर्शन कर पाएंगे।