वसई की रैली में नितेश राणे के तीखे बोल, विवादित बयान से महाराष्ट्र की राजनीति फिर गरमाई
वसई में चुनावी रैली के दौरान मंत्री नितेश राणे के विवादित बयान से महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। जानिए क्या कहा, क्यों मचा बवाल और इसका सियासी असर।
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। वसई में महानगरपालिका चुनाव के प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने समुदाय विशेष को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद राजनीतिक माहौल में तनाव साफ देखा जा रहा है। उनके भाषण के वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
हिंदू समाज के नाम पर शक्ति प्रदर्शन का दावा
सभा को संबोधित करते हुए नितेश राणे ने खुद को हिंदू समाज का मजबूत संरक्षक बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति हिंदू समाज की ओर गलत नजर से देखने की हिम्मत नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि सरकार और संगठन पूरी ताकत के साथ उनके पीछे खड़े हैं और हिंदू त्योहारों में किसी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान उनके शब्दों में आक्रामकता और सख्त चेतावनी का भाव साफ झलकता रहा।
सरकार और सत्ता को बताया हिंदुत्व की धुरी
नितेश राणे यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने भाषण में सरकार और प्रशासन को ‘हिंदुत्ववादी सोच’ वाला बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र की सत्ता से लेकर स्थानीय निकाय तक वही विचारधारा मजबूत होगी। उन्होंने मेयर पद को लेकर भी खुला बयान दिया और अपने समर्थकों से “आई लव महादेव” जैसे नारों के साथ चुनावी जीत सुनिश्चित करने की अपील की।
विवादित शब्दों से बढ़ी सामाजिक और राजनीतिक चिंता
अपने भाषण के सबसे विवादित हिस्से में मंत्री ने ‘जय श्रीराम’ और अन्य नारों का जिक्र करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे बयान न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि चुनावी माहौल को भी और ज्यादा ध्रुवीकृत करते हैं।
पहले भी बयानबाजी से घिर चुके हैं नितेश राणे
यह पहला मौका नहीं है जब नितेश राणे अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए बयान दिए थे, जिन पर काफी विवाद हुआ था। उस समय भी उनके शब्दों को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। लगातार ऐसे बयानों के चलते नितेश राणे को बीजेपी के सबसे विवादित नेताओं में गिना जाने लगा है।


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