जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अमित शाह का क्लीन चिट: ‘हेल्थ इश्यू थे, बात को ज़्यादा खींचिए मत’

अमित शाह ने कहा कि जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया, अटकलों की ज़रूरत नहीं।

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अमित शाह का क्लीन चिट: ‘हेल्थ इश्यू थे, बात को ज़्यादा खींचिए मत’

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने जुलाई के आख़िरी हफ्ते में राजनीति को चौंका दिया था। आधिकारिक तौर पर उन्होंने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ा, जिसके बाद से उनकी तबीयत और लोकेशन को लेकर अटकलें तेज़ रहीं। विपक्षी नेताओं ने पारदर्शिता की माँग की, तो सोशल मीडिया पर तरह–तरह की थ्योरियां चलने लगीं। 

इसी बहस के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने तस्वीर साफ़ करते हुए कहा कि धनखड़ ने एक संवैधानिक पद की गरिमा के साथ काम किया और व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं के कारण इस्तीफा दिया। शाह के मुताबिक, इस मामले में ज़्यादा जोड़-तोड़ या अंदाज़े लगाने की ज़रूरत नहीं है। उनका बयान एएनआई से बातचीत में आया, जिससे राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर ब्रेक लगा। 

अब नज़रें 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव पर हैं, जहाँ एनडीए ने सी. पी. राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है और इंडिया ब्लॉक की ओर से जस्टिस (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी चुनौती दे रहे हैं। नामांकन से लेकर समर्थन-जुटान तक, दोनों खेमों ने अपनी–अपनी रणनीतियाँ तेज़ कर दी हैं। 

इस बीच संसद के मॉनसून सत्र में पेश 130वाँ संविधान संशोधन विधेयक भी केंद्र में है। प्रस्तावित प्रावधानों पर सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आरोप में लगातार 30 दिन की न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटना होगा। सरकार का तर्क है कि इससे राजनीति का अपराधीकरण कम होगा और मानक सिविल सेवाओं जैसे बनेंगे, जबकि विपक्ष इसे ‘ड्रैकॉनियन’ बताते हुए दुरुपयोग की आशंका जता रहा है। बहस तीखी है और राजनीतिक नतीजे दूरगामी हो सकते हैं। 

कुल मिलाकर, धनखड़ के इस्तीफे पर गृह मंत्री का बयान ‘हेल्थ–ओनली’ नैरेटिव को पुष्ट करता है, जबकि आगामी चुनाव और संवैधानिक संशोधन की बहस आने वाले हफ्तों में राजनीतिक narrative तय करेगी।