ईरान-इजराइल टकराव में भारत की एंट्री! क्या PM मोदी बनेंगे शांति के सूत्रधार?

ईरान और अमेरिका-इजराइल जंग के बीच दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी है. जानिए क्यों भारत को इस संकट का सबसे बड़ा समाधानकर्ता माना जा रहा है.

ईरान-इजराइल टकराव में भारत की एंट्री! क्या PM मोदी बनेंगे शांति के सूत्रधार?
PM Narendra Modi

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, और इस बीच दुनिया की नजर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिक गई है. अंतरराष्ट्रीय नेताओं और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में अगर कोई नेता इस संघर्ष को शांत करा सकता है, तो वह मोदी ही हैं.

रायसीना डायलॉग में भारत की कूटनीति की सराहना
हाल ही में अलेक्जेंडर स्टब ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान भारत की कूटनीति की खुलकर तारीफ की. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम बेहद जरूरी है और भारत इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है. स्टब ने यह भी याद दिलाया कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले ही शांति की अपील कर चुके हैं.

अमेरिका के रणनीतिकार ने भी भारत पर जताया भरोसा
अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ डगलस मैकग्रेगर ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वे इस संकट से निकलने के लिए भारत की मदद लें. उनका कहना है कि बढ़ते युद्ध के बीच अमेरिका के संसाधन दबाव में हैं और तेल संकट की आशंका भी गहराती जा रही है, ऐसे में कूटनीतिक रास्ता ही एकमात्र विकल्प बचता है.

एक फोन कॉल से बदल सकते हैं हालात?
मध्य पूर्व के जानकारों की भी यही राय है कि भारत की संतुलित विदेश नीति उसे एक भरोसेमंद मध्यस्थ बनाती है. यूएई के पूर्व राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एक फोन कॉल ही हालात बदल सकता है, क्योंकि उनके इजराइल और ईरान दोनों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं.

तेल संकट से कांप रही वैश्विक अर्थव्यवस्था
इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आ रहा है और ईरान की ओर से कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक ले जाने की चेतावनी ने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है. अगर ऐसा होता है, तो कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

क्यों चीन नहीं, भारत बन सकता है असली मध्यस्थ
मौजूदा हालात में कोई भी पक्ष बातचीत के लिए तैयार नहीं दिख रहा है, और किसी निष्पक्ष देश ने अब तक मध्यस्थता की जिम्मेदारी भी नहीं ली है. हालांकि चीन ने पहल की है, लेकिन उसका झुकाव ईरान की ओर माना जाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. इसके उलट भारत ने हमेशा संतुलित और गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई है.

दोनों पक्षों से रिश्ते, भारत की सबसे बड़ी ताकत
भारत ने एक ओर जहां इजराइल के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा और रणनीतिक रिश्ते भी बनाए रखे हैं. यही संतुलन भारत को इस संकट में एक अहम भूमिका निभाने की स्थिति में लाता है.

ईरान से बातचीत में PM मोदी ने दिया शांति का संदेश
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से फोन पर बात की और क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है.

इजराइल से भी शांति पर जोर
इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर जोर दिया था. उन्होंने साफ कहा कि भारत जल्द से जल्द इस संघर्ष के समाप्त होने के पक्ष में है.