ओवैसी का बड़ा बयान: 'सीमांचल को उसका हक मिले तभी देंगे नीतीश सरकार को समर्थन'
असदुद्दीन ओवैसी ने नीतीश कुमार सरकार को समर्थन का संकेत दिया, लेकिन शर्त रखी—सीमांचल को उसका हक मिले। AIMIM ने इस बार सीमांचल में 5 सीटें जीतीं।
हैदराबाद से सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संकेत दिया है। आमौर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी नीतीश कुमार की नई सरकार को समर्थन देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त पूरी होनी चाहिए—सीमांचल को उसका “न्याय और अधिकार” मिले।
ओवैसी ने जोर देकर कहा कि बिहार का सीमांचल इलाका लंबे समय से व्यवस्था की उपेक्षा का दर्द झेल रहा है। यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी समस्याओं से अब भी जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास केवल पटना या राजगीर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सीमांचल की भी बराबर हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
'सीमांचल पलायन और भ्रष्टाचार से परेशान… अब सुधार ज़रूरी'
ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि सीमांचल के लोग पलायन, बदहाल सड़कों, बाढ़ और भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों का सामना करते-करते थक चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर सरकार ईमानदारी से इस क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम करती है, तो उनकी पार्टी सरकार के साथ खड़ी रहेगी।
'अपने विधायकों पर भी रखेंगे सख्त निगरानी'
AIMIM प्रमुख ने अपने पांचों नव-निर्वाचित विधायकों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि सभी विधायक हफ्ते में दो दिन अपने क्षेत्रीय कार्यालय में बैठेंगे और जनता की समस्याओं को सीधे सुनेंगे। इसके अलावा उन्हें अपनी लाइव लोकेशन भी नियमित तौर पर ओवैसी के साथ साझा करनी होगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे खुद हर छह महीने में सीमांचल के सभी निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
सीमांचल में AIMIM का बढ़ता जनाधार
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को सीमांचल की 14 सीटों पर जीत मिली, लेकिन AIMIM ने भी यहां अपनी मजबूत पकड़ साबित की। पार्टी ने इस क्षेत्र में लगातार दूसरी बार 5 सीटें जीती हैं। हालांकि 2020 में उसके 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे, इस बार स्थिति पूरी तरह AIMIM के पक्ष में रही।
मुस्लिम आबादी वाले इस क्षेत्र में कोसी नदी की बाढ़ एक स्थायी समस्या है, जिसके कारण यहां के ग्रामीण क्षेत्रों की हालत अक्सर खराब हो जाती है। ऐसे में विकास की प्राथमिकता बढ़ाने की मांग लगातार उठती रही है।
ओवैसी के इस ताज़ा बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि सीमांचल का विकास आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है।


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