विपक्षी एकता में दरार! राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' के बीच JPC पर फंसा पेंच, कांग्रेस अकेली पड़ी
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बीच विपक्षी INDIA गठबंधन में बड़ी दरार आ गई है। अमित शाह द्वारा पेश किए गए JPC Bill पर TMC, SP और AAP ने कमेटी से दूरी बना ली है, जबकि कांग्रेस इसमें शामिल होने की पक्षधर है। जानें पूरी राजनीतिक जंग।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इन दिनों बिहार में अपनी ‘Voter Adhikar Yatra’ के जरिए मतदाताओं को साधने में जुटे हैं और लगातार एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पर चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल दाग रहे हैं। लेकिन इसी बीच दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, जिसने विपक्षी INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमित शाह का बिल और JPC की सियासत
संसद के मानसून सत्र में गृहमंत्री अमित शाह ने एक अहम Bill पेश किया था, जिसमें प्रावधान है कि कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है तो उसे पद से हटना होगा।
इस बिल को Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजा गया है, जो अगली रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में देगी।
कौन है JPC में शामिल, कौन पीछे हटा
शुरुआत में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बिल का विरोध किया था, लेकिन अब INDIA गठबंधन में दरार साफ दिखने लगी है। ममता बनर्जी की TMC ने JPC से दूरी बना ली। अखिलेश यादव की SP भी शामिल होने के खिलाफ है। AAP (आम आदमी पार्टी) ने भी साफ इनकार कर दिया है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना अब भी असमंजस में है। इस तरह कांग्रेस अब अकेली पार्टी है जो JPC में शामिल होने की इच्छुक है।
कांग्रेस क्यों चाहती है शामिल होना?
कांग्रेस का तर्क है कि JPC की बैठकों में विपक्ष का पक्ष रखना जरूरी है। पार्टी का मानना है कि अगर वह बाहर रहती है तो बीजेपी को बिना चुनौती दिए एकतरफा माहौल बनाने का मौका मिल जाएगा। यही कारण है कि कांग्रेस “opposition unity vs parliamentary accountability” के बीच फंस गई है।
विपक्षी एकता पर संकट
यह पूरा घटनाक्रम राहुल गांधी की ‘Voter Adhikar Yatra’ के बीच विपक्षी खेमे में संदेश दे रहा है कि अभी भी रणनीति पर एकमत होना मुश्किल है। JPC से बाहर रहने वाले दलों का मानना है कि समिति महज औपचारिकता है और इसका मकसद विपक्ष को फंसाना है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि बाहर रहने से विपक्ष की आवाज दब जाएगी।


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