बीजेपी अध्यक्ष बनते ही नितिन नबीन एक्शन मोड में, पहले फैसलों से दिखी नई टीम की तस्वीर
बीजेपी अध्यक्ष बनते ही नितिन नबीन एक्शन मोड में आ गए हैं। केरल विधानसभा और निगम चुनावों के लिए किए गए पहले फैसलों से उनकी नई टीम और रणनीति की झलक मिलती है।
बीजेपी की कमान संभालने के अगले ही दिन नितिन नबीन ने यह साफ कर दिया कि उनका कार्यकाल सक्रियता और तेजी से भरा रहने वाला है। मंगलवार को अध्यक्ष पद ग्रहण करने के बाद उनकी कलम से पार्टी के पहले बड़े फैसलों पर हस्ताक्षर हुए। इन फैसलों के तहत केरल विधानसभा चुनाव और कई महत्वपूर्ण नगर निगम चुनावों के लिए प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पार्टी के भीतर इन नियुक्तियों को नितिन नबीन की संभावित टीम की पहली झलक के तौर पर देखा जा रहा है।
केरल चुनाव में विनोद तावड़े पर बड़ा दांव
केरल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को चुनाव प्रभारी बनाया है। तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए भी पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिहार में पार्टी के प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका और वहां एनडीए की हालिया सफलता ने पार्टी नेतृत्व का भरोसा और मजबूत किया है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि केरल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौंपा जाना, संगठन में तावड़े की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
टीम नितिन में तावड़े और बंसल की संभावित भूमिका
वर्तमान राष्ट्रीय महासचिवों में सबसे वरिष्ठ चेहरों में गिने जाने वाले विनोद तावड़े को लेकर यह चर्चा तेज है कि वे आने वाले समय में नितिन नबीन की कोर टीम का अहम हिस्सा हो सकते हैं। सुनील बंसल के साथ उनका नाम उन नेताओं में शामिल है, जिन्हें नई टीम में प्रमुख जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। केरल में तावड़े के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है, जिससे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
राम माधव की सक्रिय राजनीति में मजबूत वापसी
नितिन नबीन के फैसलों में दूसरा बड़ा नाम राम माधव का है। उन्हें ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनाव का प्रभारी बनाया गया है। कभी अमित शाह की टीम में राष्ट्रीय महासचिव रहे राम माधव जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में पार्टी की चुनावी रणनीति के अहम स्तंभ रहे हैं। 2020 में संगठन से बाहर होने के बाद उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी का संकेत 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में मिला था। अब नगर निगम चुनाव की जिम्मेदारी मिलना, उनकी वापसी को और मजबूत करता है।
सतीश पूनिया और संजय उपाध्याय को नई जिम्मेदारी
ग्रेटर बेंगलुरु निगम चुनाव में राम माधव के साथ राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को सह प्रभारी बनाया गया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पूनिया संगठन में नए अवसर की तलाश में थे। हरियाणा विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत और बिहार में निभाई गई भूमिका ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है। उनके साथ महाराष्ट्र विधानसभा सदस्य संजय उपाध्याय को भी सह प्रभारी बनाया गया है, जिससे चुनावी प्रबंधन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तेलंगाना निगम चुनाव में आशीष शेलार को कमान
तेलंगाना नगर निगम चुनावों के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार को प्रभारी नियुक्त किया गया है। युवा नेताओं में गिने जाने वाले शेलार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाते हैं। युवा मोर्चा से लेकर संगठन और खेल प्रशासन तक उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी माना जा रहा है। उनके साथ राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी और हरियाणा से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा को सह प्रभारी बनाया गया है।
तेज़ फैसले, स्पष्ट इरादे और आगे की रणनीति
नितिन नबीन के इन शुरुआती फैसलों से यह संकेत साफ है कि वे देरी के बजाय तेज़ निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं। अध्यक्ष पद संभालते ही उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। बुधवार को देश भर से आए प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महासचिवों के साथ दिन भर मंथन का कार्यक्रम तय है। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के साथ तालमेल मजबूत करने की दिशा में भी अहम बैठकें प्रस्तावित हैं। कुल मिलाकर, नितिन नबीन का पहला कदम ही उनके आक्रामक और कामकाजी नेतृत्व की तस्वीर पेश करता है।


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