भारत दौरे पर पुतिन का ‘फ्लाइंग फोर्ट्रेस’, आसमान में चलता है रूस का कमांड सेंटर
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे अपने खास विमान IL-96-300 PU से, जिसमें न्यूक्लियर कमांड बटन से लेकर हाई-सिक्योरिटी सिस्टम तक मौजूद है।
गुरुवार शाम 4 दिसंबर को जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विशेष विमान नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा, तो यह सिर्फ एक डिप्लोमैटिक विजिट नहीं बल्कि सुरक्षा और तकनीक की ताकत का प्रदर्शन भी था। प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उन्हें रिसीव करने पहुंचे। चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना पुतिन का शाही और अत्याधुनिक विमान, जिसे दुनिया “फ्लाइंग क्रेमलिन” या “फ्लाइंग प्लूटन” के नाम से जानती है। यह विमान केवल एक यात्री विमान नहीं, बल्कि हवा में उड़ता एक पूरी सरकार जैसा सिस्टम है।
हवा में उड़ता हुआ व्हाइट हाउस जैसा ऑफिस
यह विशेष विमान इल्युशिन IL-96-300 PU मॉडल का है, जो रूस के वाइड-बॉडी एयरलाइनर परिवार से आता है। करीब 262 यात्रियों की क्षमता वाला यह विमान एक बार में लगभग 11,000 किलोमीटर तक बिना रुके उड़ान भर सकता है। इसमें हाई-लेवल मीटिंग रूम, अत्याधुनिक जिम, बार, मेडिकल यूनिट और पूरी तरह से सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम मौजूद है। यही नहीं, यह विमान हवा में ही री-फ्यूलिंग करने की क्षमता भी रखता है, जिससे यह लंबे समय तक आसमान में बना रह सकता है और किसी भी आपात स्थिति में एक एक्टिव कमांड सेंटर की तरह काम करता है।
न्यूक्लियर बटन और तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था
इस विमान की सबसे संवेदनशील और खतरनाक खूबियों में से एक है इसका इमरजेंसी न्यूक्लियर कमांड बटन। यानी पुतिन इस विमान में बैठकर भी सीधे किसी बड़े सैन्य हमले का आदेश दे सकते हैं। विमान के नोज पर लिखा “UT-96” इसके मूल मॉडल की पहचान कराता है, जबकि “96” इसका आधिकारिक डिजिग्नेशन है। 1992 से सेवा में मौजूद इस प्लेटफॉर्म को रूसी सरकार ने राष्ट्रपति के लिए बेहद मॉडिफाई किया है। सुरक्षा को लेकर यह भी अहम है कि पुतिन के हर विदेशी दौरे में उनके साथ एक या दो बैकअप जेट हमेशा उड़ते हैं और उनके बॉडीगार्ड को यात्रा से पहले करीब दो हफ्ते तक विशेष क्वारनटाइन में रखा जाता है।


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