गिल की चोट ने खोला पिटारा: गंभीर का बड़ा धमाका—‘वर्कलोड चाहिए तो IPL छोड़ो!'

शुभमन गिल की अचानक चोट ने भारतीय क्रिकेट में वर्कलोड मैनेजमेंट की बहस को फिर तेज कर दिया है। गौतम गंभीर ने IPL को लेकर सख्त बयान दिया है।

गिल की चोट ने खोला पिटारा: गंभीर का बड़ा धमाका—‘वर्कलोड चाहिए तो IPL छोड़ो!'
Shubman Gill

भारतीय क्रिकेट में वर्कलोड मैनेजमेंट पर चल रही बहस अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। कोलकाता टेस्ट के दौरान शुभमन गिल की गर्दन में अचानक हुई जकड़न ने टीम इंडिया की तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है और साथ ही यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत के ऑल-फॉर्मेट स्टार्स पर जरूरत से ज्यादा भार डाला जा रहा है।

दो महीने से लगातार क्रिकेट, हर फॉर्मेट में दबाव
पिछले दो महीनों में गिल ने लगभग बिना ब्रेक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है। एशिया कप से लेकर घरेलू साउथ अफ्रीका सीरीज तक वे लगातार मैदान में बने रहे। कई खिलाड़ियों को रोटेशन का लाभ मिला, लेकिन गिल को हर फॉर्मेट में उतरना पड़ा। ODI कप्तान और T20 टीम के उपकप्तान के रूप में उन पर जिम्मेदारियाँ दोगुनी हो गईं। ईडन गार्डन्स टेस्ट में उन्हें Neck Spasm हुआ और वे निर्णायक टेस्ट से बाहर हो गए।

गंभीर का दो टूक बयान— 'वर्कलोड चाहिए, तो IPL छोड़ो'
गिल की चोट सामने आते ही वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई, लेकिन टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इस चर्चा को बिल्कुल अलग दिशा दे दी। 

जियोस्टार के एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा के अनुसार गंभीर ने साफ कहा— अगर वर्कलोड मैनेजमेंट चाहिए, तो IPL छोड़ दो। कप्तानी का दबाव ज्यादा है, तो कप्तानी मत करो। लेकिन इंडिया के लिए खेलने के वक्त फिटनेस और थकान के बहाने नहीं चलेंगे। यह बयान भारतीय क्रिकेट में मौजूद उस सोच पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों से खिलाड़ियों को लगातार रेस्ट दिया जाता रहा है।

गंभीर की चेतावनी—राष्ट्र पहले, लीग बाद में
आकाश चोपड़ा ने भी गंभीर की राय का समर्थन करते हुए कहा कि फॉर्म एक बल्लेबाज की सबसे कीमती पूंजी है। जब रन बन रहे हों, तब ब्रेक लेने के बजाय मैदान में बने रहना जरूरी होता है, क्योंकि फॉर्म कितने दिन साथ देगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

गिल की रिकवरी पर BCCI की नजर
BCCI के मुताबिक गिल को कम से कम 10 दिनों के आराम की जरूरत है। हालांकि उम्मीद है कि वह 30 नवंबर से शुरू होने वाली साउथ अफ्रीका ODI सीरीज तक फिट हो जाएंगे। इसके बाद होने वाली T20I सीरीज में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गिल की चोट ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को अब यह तय करना ही होगा कि वह किस मॉडल पर आगे बढ़ना चाहता है।

क्या IPL की आर्थिक ताकत और ब्रांड वैल्यू को प्राथमिकता देकर खिलाड़ियों से लगातार खेलने की उम्मीद की जाएगी? या फिर गंभीर के मॉडल पर चलते हुए राष्ट्रीय टीम को सर्वोच्च महत्व देते हुए कठोर वर्कलोड नियम बनाए जाएंगे? यह बहस अब थमने वाली नहीं है, बल्कि गिल की चोट ने इसमें नई आग भर दी है।