कर्नाटक में सत्ता संग्राम तेज: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार — बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस में नई कलह!
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष तेज हो गया है। बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर उभर रही नाराज़गी अब कर्नाटक तक पहुँच चुकी है। दिल्ली में विधायकों की सक्रियता और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच हाईकमान दबाव में है।
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन ने पार्टी के भीतर पहले से मौजूद असंतोष को फिर से सतह पर ला दिया है। इस असंतोष की लहर अब सीधे कर्नाटक तक पहुँची है, जहाँ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच पुरानी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। दोनों बड़े नेताओं के बीच सत्ता-संतुलन को लेकर चल रही रस्साकशी अब कर्नाटक की राजनीति से निकलकर दिल्ली की गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस हाईकमान भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
दिल्ली में शिवकुमार खेमे की सक्रियता बढ़ी
सूत्र बताते हैं कि डीके शिवकुमार के करीबी लगभग 10 विधायक अचानक दिल्ली पहुँच गए और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात भी की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब सिद्धारमैया अपने ढाई साल के कार्यकाल को पूरा कर चुके हैं। यही वजह है कि इन मुलाकातों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालाँकि शिवकुमार ने सार्वजनिक तौर पर इन मुलाकातों से दूरी बनाई है, लेकिन उनके समर्थकों की लगातार दिल्ली में मौजूदगी साफ संकेत देती है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सियासी तापमान बढ़ चुका है।
दिल्ली पहुँचे विधायक बोले — हमें भी मौका मिले
दिल्ली आए विधायक टीडी राजेगौड़ा ने खुलकर कहा कि मुख्यमंत्री बदलना है या नहीं, यह फैसला पूरी तरह हाईकमान का है। उनका कहना था कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मौका मिलना चाहिए और इसके लिए वे खुद अपनी बात रखने दिल्ली आए हैं। इस बयान ने साफ कर दिया है कि शिवकुमार खेमे के विधायक अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाना चाहते हैं।
सिद्धारमैया ने जताई दृढ़ता — '2025 का बजट मैं ही पेश करूँगा'
नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि वे 2025 का बजट खुद पेश करेंगे। उन्होंने ‘नवंबर क्रांति’ जैसे कयासों को मीडिया की कल्पना बताया और कहा कि पार्टी ने उन्हें पाँच साल का जनादेश दिया है, जिसे वे पूरा करेंगे। सिद्धारमैया का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। यदि वे 2026 तक पद पर बने रहते हैं, तो वे देवराज अर्स का रिकॉर्ड पार कर लेंगे।
शिवकुमार भी पीछे हटने को तैयार नहीं — ‘मैं लाइन में पहला हूँ’
उधर, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कई महीनों से सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं। 2023 में सरकार बनने के बाद यह माना जा रहा था कि ढाई साल बाद नेतृत्व परिवर्तन संभव है। अब समय पूरा होने के बाद उनके समर्थक हाईकमान पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
एक कार्यक्रम में शिवकुमार ने यहां तक कह दिया कि वे हमेशा के लिए कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रह सकते। समर्थकों के “अगले मुख्यमंत्री शिवकुमार” वाले नारे पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा — चिंता मत करो, मैं लाइन में पहले नंबर पर हूँ।
यह बयान साफ दिखाता है कि वे मौका तलाश रहे हैं और पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
कर्नाटक कांग्रेस में अस्थिरता बढ़ी — हाईकमान की मुश्किलें भी
बिहार में निराशाजनक नतीजों के बाद हाईकमान पहले ही दबाव में है, ऐसे में कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में सत्ता संघर्ष पार्टी की नई चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर बड़ा निर्णय संभव है — या तो समझौता, या नेतृत्व परिवर्तन।


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