युद्ध टला या तूफान से पहले सन्नाटा? ट्रंप का यू-टर्न, ईरान पर कार्रवाई रुकी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले टाल दिए हैं। जानिए होर्मुज संकट, तेल कीमतों और वैश्विक असर की पूरी कहानी।

युद्ध टला या तूफान से पहले सन्नाटा? ट्रंप का यू-टर्न, ईरान पर कार्रवाई रुकी
Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और ढांचे पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में सकारात्मक बातचीत हुई है, जिससे मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद जगी है।

ट्रुथ पर ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि बीते दो दिनों में ईरान के साथ हुई बातचीत काफी सकारात्मक और परिणाम देने वाली रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस सप्ताह भी चर्चा जारी रखेंगे और इसका मकसद क्षेत्र में चल रहे टकराव का स्थायी समाधान निकालना है। इसी कारण उन्होंने फिलहाल हमलों को टालने का फैसला लिया है, हालांकि आगे की कार्रवाई बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी।

चेतावनी से बातचीत तक पहुंचा मामला
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। लेकिन ताजा घटनाक्रम से साफ है कि दोनों देश अब तीखी बयानबाजी से आगे बढ़कर बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान की सख्त चेतावनी, खाड़ी में बढ़ा खतरा
ईरान ने भी अमेरिकी चेतावनी पर सख्त प्रतिक्रिया दी थी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने साफ कहा था कि अगर उनके बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, तो खाड़ी क्षेत्र के अहम ढांचों को निशाना बनाया जाएगा। वहीं ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी चेतावनी दी थी कि अमेरिकी ठिकानों वाले देशों के ऊर्जा केंद्र उनके निशाने पर होंगे।

होर्मुज पर संकट, दुनिया पर असर
ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति होती है। हालिया तनाव के चलते इस मार्ग पर आवाजाही बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेजी और अस्थिरता देखने को मिली है।

भारत समेत कई देशों पर असर
ईरान ने कुछ देशों जैसे भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान के जहाजों को सीमित रूप से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इससे भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश की जरूरतों पर असर पड़ा है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हुई है।

ईरान का संकेत, लेकिन हालात तनावपूर्ण
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि होर्मुज उन देशों के लिए खुला है जो ईरान के विरोधी नहीं हैं। हालांकि जमीनी स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है।

युद्ध का असर आम लोगों पर भारी
इजरायल के अनुसार, संघर्ष के दौरान ईरान ने 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से अधिकांश को रोक दिया गया। वहीं इस टकराव के कारण आम लोगों पर भी असर पड़ा है। ईरान में हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि इजरायल में हजारों लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।