बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक वापसी, तारिक रहमान का पीएम बनना तय
Bangladesh Election 2026 में BNP ने 211 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया। Tarique Rahman की जीत के बाद 20 साल में पहली बार BNP सरकार बनाने की तैयारी में है।
अवामी लीग सरकार के पतन के बाद हुए बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। लगभग दो दशकों बाद Bangladesh Nationalist Party ने बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है। मतगणना देर रात तक चलती रही और अनौपचारिक नतीजों में बीएनपी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखी। 299 सीटों में से अधिकांश पर परिणाम सामने आ चुके हैं और तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है कि अगली सरकार बीएनपी के नेतृत्व में बनेगी।
बीएनपी गठबंधन को 211 सीटें, जमात दूसरे नंबर पर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएनपी और उसके सहयोगियों ने 211 सीटों पर जीत दर्ज की है। दूसरी ओर, Bangladesh Jamaat-e-Islami को 70 सीटों पर सफलता मिली, जबकि अन्य दलों को सीमित समर्थन मिला। इस चुनाव में अपदस्थ प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की पार्टी Awami League के चुनाव से बाहर रहने के कारण मुकाबला सीधे बीएनपी और जमात के बीच सिमट गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की अनुपस्थिति ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए।
तारिक रहमान की जीत से पीएम पद की राह साफ
बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के बेटे Tarique Rahman ने बोगुरा सीट से निर्णायक जीत दर्ज की। उन्हें 2 लाख 16 हजार से अधिक वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात उम्मीदवार को करीब 97 हजार वोट मिले। बीएनपी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि सत्ता में आने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, जिससे अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
जमात नेतृत्व की भी अहम सीटों पर जीत-हार
ढाका की एक सीट से जमात प्रमुख शफीकुर रहमान को जीत मिली, जहां उन्होंने बीएनपी प्रत्याशी को पीछे छोड़ा। वहीं बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ठाकुरगांव से भारी मतों से जीत दर्ज की। दूसरी ओर जमात के महासचिव मिया गुलाम पोरवार को खुलना सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने यह संकेत दिया कि जमात को कुछ क्षेत्रों में समर्थन मिला, लेकिन वह सत्ता के आंकड़े से दूर रह गई।
84 सूत्री सुधार पैकेज पर भी हुआ जनमत संग्रह
संसदीय चुनाव के साथ-साथ जुलाई राष्ट्रीय चार्टर नाम से 84 सूत्री सुधार कार्यक्रम पर जनमत संग्रह भी कराया गया। मतदान शाम साढ़े चार बजे खत्म हुआ और तुरंत बाद मतगणना शुरू कर दी गई। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे देश के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था बताया जा रहा है।
अंतरिम शासन का अंत और नई राजनीतिक दिशा
यह चुनाव इसलिए भी अहम रहा क्योंकि इसके साथ ही अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल का अंत तय माना जा रहा है। बीएनपी की जीत को देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं जमात-ए-इस्लामी, जिसने 1971 में स्वतंत्रता का विरोध किया था, पहली बार इस्लामी नेतृत्व वाली सरकार की उम्मीद कर रही थी, लेकिन जनता ने स्पष्ट रूप से बीएनपी के पक्ष में जनादेश दिया। अब नजरें नई सरकार के गठन और उसके शुरुआती फैसलों पर टिकी हैं।


आँखें न्यूज़ 24 




