नीतीश कुमार की 10वीं पारी तय! महिलाओं को 10,000 रुपये ट्रांसफर वाली स्कीम बनी ‘मास्टरस्ट्रोक’

बिहार चुनाव 2025 में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है और नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं। महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये ट्रांसफर वाली ‘महिला रोजगार योजना’ चुनाव का गेम चेंजर साबित हुई है। जानें कैसे 1.5 करोड़ महिलाओं को मिले इस लाभ ने पूरा राजनीतिक समीकरण बदल दिया।

नीतीश कुमार की 10वीं पारी तय! महिलाओं को 10,000 रुपये ट्रांसफर वाली स्कीम बनी ‘मास्टरस्ट्रोक’
Nitish Kumar

बिहार चुनाव के ताज़ा ट्रेंड साफ़ दिखाते हैं कि एनडीए एक बार फिर राज्य की सत्ता में शान के साथ वापसी कर रही है। इस जीत के केंद्र में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—नीतीश कुमार। वे पहले ही नौ बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुके हैं, और अब इतिहास रचते हुए दसवीं पारी शुरू करने को तैयार हैं। भारतीय राजनीति में यह बहुत दुर्लभ है कि कोई नेता दो दशक से ज्यादा समय तक जनता के भरोसे पर बना रहे, लेकिन नीतीश ने यह कमाल कर दिखाया है।

10,000 रुपये वाली महिला कैश ट्रांसफर योजना बनी गेम चेंजर
चुनाव में सबसे बड़ा टर्नअराउंड फैक्टर साबित हुआ—महिलाओं के खाते में डाले गए 10 हजार रुपये। इस योजना ने महिला मतदाताओं के भीतर नीतीश सरकार के प्रति जबरदस्त भरोसा पैदा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर को इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ किया था, जिसके तहत 75 लाख महिलाओं को शुरुआत में राशि दी गई। बाद में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ तक पहुंच गई।

अंतिम समय में हुआ बड़ा राजनीतिक लाभ
विपक्ष ने इस योजना को वोट खरीदने की कोशिश बताया था, लेकिन चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि इस स्कीम ने नीतीश के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को पूरी तरह उलट दिया। 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजने से इसका सीधा असर 4–5 करोड़ परिवारों पर पड़ा। यानी सिर्फ लाभार्थी ही नहीं, उनके घर की अन्य महिलाओं ने भी एनडीए के लिए वोट किया।

महिलाओं के लिए ‘रिफंड-फ्री’ रकम और आगे 2 लाख तक का लोन
10 हजार रुपये ऐसी रकम है जिसे लौटाना नहीं होता। सरकार ने इसे रोजगार शुरू करने की पूंजी के तौर पर दिया है। अगर कोई महिला इस पैसे से स्व-रोजगार खड़ा करती है, तो राज्य सरकार की तरफ से आगे उन्हें 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन भी मिलेगा।

महिलाओं के लिए योजनाओं का नीतीश का लंबा रिकॉर्ड
नीतीश कुमार की राजनीति में महिलाओं का समर्थन हमेशा से निर्णायक रहा है। चाहे साइकिल योजना हो, छात्रवृत्ति, शराबबंदी, पंचायत में 50% आरक्षण या सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण—हर नीति ने महिला वोट बैंक को मजबूत किया। इस बार नीतीश ने कैश ट्रांसफर कर ‘ट्रस्ट चेन’ को और ठोस कर दिया, जिसका असर वोटिंग प्रतिशत में भी दिखा, जहां 71% से ज्यादा महिला मतदाता मतदान के लिए बाहर आईं।

20 साल के कार्यकाल के बाद 10वीं बार सत्ता की ओर
नीतीश कुमार ने पहली बार मार्च 2000 में अल्पमत में सिर्फ सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला था। उसके बाद 2005 में बहुमत के साथ वापसी हुई। 2010 में तीसरी बार, फिर 2015 में महागठबंधन के सहारे, 2017 में वापस एनडीए में, 2020 में फिर सत्ता—और 2024 में एक और यू-टर्न के साथ बिहार की कमान नीतीश ने नौवीं बार संभाली। अब दसवीं बार सीएम की कुर्सी उनका इंतजार कर रही है।