बिहार चुनाव 2025: एनडीए में सीट शेयरिंग पर अंतिम दौर की खींचतान, नीतीश और सम्राट चौधरी के बीच फंसा पेच !
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग विवाद, सम्राट चौधरी की तारापुर सीट पर खींचतान और नीतीश कुमार की नाराजगी। चुनाव से पहले अंतिम दौर की बातचीत और संभावित Plan B पर अपडेट।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया में केवल चार दिन बचे हैं, लेकिन एनडीए के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। कई दिनों से चल रही बातचीत के बावजूद, सीटों को लेकर ऐलान टलता जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार reportedly इस समय सीट बंटवारे से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। एनडीए के अंदर चार प्रमुख सीटों पर विवाद है, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तारापुर सीट भी शामिल है। इसके अलावा सोनबरसा, राजगीर और मोरवा सीटों पर भी तालमेल नहीं बन पाया है।
सम्राट चौधरी की तारापुर सीट पर विवाद
बीजेपी ने उपमुख्यमंत्री और अपने बड़े चेहरे सम्राट चौधरी को तारापुर सीट से उतारने की योजना बनाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने reportedly इस पर आपत्ति जताई। इस पर बीजेपी ने सम्राट चौधरी के लिए विकल्प योजना (Plan B) तैयार की है, जिसमें उन्हें पटना की कुम्हरार या पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है।
सिर्फ तारापुर ही नहीं, बल्कि जेडीयू के तीन अन्य अहम सीटों पर भी विवाद है। ये तीनों सीटें—सोनबरसा, राजगीर और मोरवा—चिराग पासवान को दी गई हैं। नीतीश कुमार reportedly इन्हें वापस लेना चाहते हैं। खासकर सोनबरसा सीट पर, जहां मंत्री रत्नेश सदा जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार हैं।
सीट शेयरिंग पर अंतिम दौर की बातचीत
बिहार में इस बार दो चरणों (6 और 11 नवंबर) में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं। पहले चरण के लिए नामांकन 17 अक्टूबर तक चलेंगे। हालांकि, एनडीए और महागठबंधन दोनों अभी तक सीट शेयरिंग को लेकर औपचारिक ऐलान नहीं कर पाए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों गठबंधनों की ओर से अंतिम मुहर आने वाले एक-दो दिनों में लग सकती है। महागठबंधन में भी अंतिम दौर की बातचीत में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच हल्की खींचतान देखने को मिली है। बावजूद इसके, दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि "सब कुछ तय है।"
चुनावी परिदृश्य और आगे की राह
एनडीए में सीटों को लेकर खींचतान और विकल्प योजना के कारण राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। सम्राट चौधरी की तारापुर सीट की स्थिति, साथ ही सोनबरसा, राजगीर और मोरवा पर विवाद, पहले चरण के चुनाव की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
जैसे-जैसे नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि सीटों का फाइनल बंटवारा और गठबंधन रणनीति आने वाले 48 घंटे में स्पष्ट हो सकती है।


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