गोवा नाइट क्लब अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जमानत से फिर झटका, कोर्ट ने कहा– ‘सच छिपाने की कोशिश दिखती है’
गोवा नाइट क्लब अग्निकांड मामले में रोहिणी कोर्ट ने लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। जानिए दोनों पक्षों की पूरी दलीलें, सरकार के आरोप, बचाव पक्ष के तर्क और कोर्ट का अंतिम रुख।
गोवा नाइट क्लब में लगी भयावह आग और 25 लोगों की मौत के मामले में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने सौरभ और गौरव लूथरा को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि घटना के तुरंत बाद विदेश जाना, गलत सूचनाएं देना और जांच से बचने की कोशिश गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
सरकार बोली—लाइसेंस खत्म, NOC नहीं, फिर भी क्लब चल रहा था
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि लूथरा ब्रदर्स ने अपना बचाव करने के बजाय झूठे दावे किए। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने यह बताकर गुमराह किया कि वे बिजनेस सिलसिले में बैंकॉक गए थे और क्लब सिर्फ “लाइसेंस पर” दिया हुआ था। लेकिन रिकॉर्ड में सौरभ लूथरा को क्लब का सिग्नेटरी दिखाया गया है और ट्रेड लाइसेंस 2023 में ही खत्म हो चुका था, जिसे रिन्यू भी नहीं कराया गया।
घटना के बाद विदेश भागने को लेकर सरकार ने कसा शिकंजा
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि अग्निकांड के अगले ही दिन दोनों भाई मेक माई ट्रिप से टिकट बुक कर इंडिगो की फ्लाइट से थाईलैंड पहुंच गए। जबकि पुलिस जब उनके घर पहुंची तो मां और बहन ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है। फोन भी स्विच ऑफ था। इसी आधार पर कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट और बाद में लुक आउट नोटिस जारी किया। इंटरपोल ने भी ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया।
फायर विभाग की रिपोर्ट ने बढ़ाई कानूनी मुश्किलें
गोवा फायर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट ने मामले को और पेचीदा बना दिया। विभाग ने कहा कि बार के लिए NOC नहीं ली गई थी, आग से बचाव के रास्ते भी एक ही दिशा में थे और आयोजन के समय “फायर शो” किया गया, जो बिना अनुमति था। सरकारी पक्ष ने दावा किया कि कोर्ट के सामने गलत जानकारी रखकर जांच से बचने की कोशिश की गई।
बचाव पक्ष बोला—सरकार रिवेंज मोड में, धमकियों से डरा परिवार
वहीं लूथरा ब्रदर्स की ओर से वकील तनवीर मीर ने कोर्ट में पूरी तरह अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि घटना के बाद उनके मुवक्किल और परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। गोवा सरकार की “बदले की कार्रवाई” बताकर उन्होंने दावा किया कि उनके दो रेस्टोरेंट और क्लब पर बुलडोजर चला दिया गया, प्रॉपर्टी सील कर दी गई।
“फरार नहीं, डरे हुए थे… सुरक्षा मिलती तो तुरंत लौट आते” – बचाव पक्ष
मीर ने कहा कि अगर लूथरा ब्रदर्स फरार होते तो कोर्ट में पेश ही नहीं होते। उन्होंने कहा कि रात में प्रोटेक्शन मिल जाता तो सुबह होते ही भारत लौट आते। आरोप था कि बिना नोटिस दिए ही पुलिस ने वारंट जारी कर दिया और सरकार लगातार उन्हें अपराधी की तरह पेश कर रही है।
“ऑपरेशन मैनेजर सब संभालता था, हम गोवा में थे ही नहीं”
वकील ने यह भी कहा कि आग की घटना के वक्त दोनों भाइयों की मौजूदगी क्लब में नहीं थी। देशभर में उनके 14 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं, जिनका संचालन स्थानीय मैनेजमेंट देखता है। उन्होंने फुकेट में बिजनेस होने का दावा करते हुए कहा कि 6 दिसंबर को पहले से टिकट बुक करने की प्रक्रिया चल रही थी और घटना उसी रात घट गई।
“सुरक्षा दीजिए, वापस आकर सरेंडर करेंगे”—बचाव पक्ष की अंतिम दलील
मीर ने जोर देकर कहा कि उनका मुवक्किल भारत वापस आने को तैयार है, पुलिस से सिर्फ सुरक्षा चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर पुलिस स्टेशन में भीड़ घुसकर हमला कर दे तो जिम्मेदारी किसकी होगी?” मीर ने ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल की मांग करते हुए कहा कि वर्चुअली 90% जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस ने यह नहीं बताया कि कस्टडी की जरूरत क्यों है।
अदालत बोली—गलत सूचनाओं और आचरण के कारण राहत नहीं मिल सकती
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि लूथरा ब्रदर्स ने कई बिंदुओं पर अस्पष्ट और विरोधाभासी जानकारी दी है। जांच से बचने के संकेत मिलने के चलते उन्हें अग्रिम जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा। अदालत के इस फैसले से साफ है कि आग की इस त्रासदी में अब जांच और भी तेज होने वाली है।


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