रुपये की रिकॉर्ड गिरावट: डॉलर के मुकाबले एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना इंडियन रुपया
2025 में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। 4 महीने में 5% से ज्यादा और सालाना 3% की गिरावट। जानें रुपये की कमजोरी के कारण, टैरिफ का असर और मार्केट एक्सपर्ट्स की राय।
भारत की करेंसी यानी Indian Rupee लगातार दबाव में है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक रुपया 3% से ज्यादा टूट चुका है, जबकि मई 2025 में अपने साल के उच्चतम स्तर से यह 5% से ज्यादा गिर चुका है। 2 सितंबर को रुपया 88.18 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इसका अब तक का रिकॉर्ड लोअर लेवल है।
टैरिफ और ट्रेड वार का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपए की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह है ट्रेड टैरिफ (Trade Tariffs)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा सेक्टर पर 200% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इससे भारत-अमेरिका ट्रेड डील की अनिश्चितता और बढ़ गई है।
- अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है
- घरेलू शेयर बाजार गिरावट में हैं
- विदेशी निवेशक लगातार पूंजी निकाल रहे हैं
ये सभी फैक्टर मिलकर रुपए पर दबाव डाल रहे हैं।
आंकड़ों में गिरावट
2 मई 2025: रुपया 83.76 प्रति डॉलर पर – इस साल का सबसे मजबूत स्तर।
2 सितंबर 2025: रुपया 88.18 प्रति डॉलर पर – अब तक का सबसे कमजोर स्तर।
4 महीने में गिरावट: 5.28%
सालाना गिरावट: 3.06%
पिछले साल के मुकाबले: रुपया लगभग ₹3 कमजोर हुआ।
इस गिरावट ने भारतीय रुपए को एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना दिया है।
बाजार की स्थिति
डॉलर इंडेक्स: 0.63% चढ़कर 98.38 पर
ब्रेंट क्रूड ऑयल: 1.80% बढ़कर $69.38 प्रति बैरल
सेंसेक्स: 206.61 अंक गिरकर 80,157.88 पर बंद
निफ्टी: 45.45 अंक टूटकर 24,579.60 पर बंद
FII सेलिंग: विदेशी निवेशकों ने 1,429.71 करोड़ के शेयर बेचे
क्या सुधार की उम्मीद है?
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का मानना है कि निकट भविष्य में रुपए में सुधार की संभावना कम है।
- अमेरिका से आने वाले ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI और नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट से दिशा तय होगी।
- विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की कीमतें रुपए को कमजोर करती रहेंगी।
- डॉलर/रुपया (USD/INR) का रेंज 87.80 से 88.50 तक रह सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सस्पेंस
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच Bilateral Trade Agreement (BTA) पर बातचीत जारी है। अब तक 5 राउंड की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने के बाद छठा राउंड टल गया।
भारत पहले ही ऑस्ट्रेलिया, UAE, मॉरीशस, UK और EFTA देशों के साथ FTA साइन कर चुका है। उम्मीद है कि अमेरिका के साथ भी किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा।


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