मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे की जीत, सरकार ने जारी किया हैदराबाद गजट, मिलेगी ओबीसी कोटे में जगह

मराठा आरक्षण 2025 पर बड़ा फैसला। महाराष्ट्र सरकार ने हैदराबाद गजट जारी कर मराठा समाज को कुनबी जाति का दर्जा दिया। जानें मनोज जरांगे के आंदोलन, सरकार के फैसले और आरक्षण के नए रास्ते की पूरी जानकारी।

मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे की जीत, सरकार ने जारी किया हैदराबाद गजट, मिलेगी ओबीसी कोटे में जगह
Manoj Jarange

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई (Mumbai) में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे (Manoj Jarange) की मांगों के बाद राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए "हैदराबाद गजट" जारी कर दिया है। इस गजट के अनुसार मराठा समाज को कुनबी जाति (Kunbi Caste) का दर्जा मिलेगा।

कुनबी दर्जा और आरक्षण का रास्ता
कुनबी जाति पहले से ही महाराष्ट्र में ओबीसी (OBC) श्रेणी में शामिल है। अब मराठा समाज को भी कुनबी दर्जा दिए जाने से उन्हें सीधे तौर पर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का लाभ मिलेगा। इस फैसले से न केवल मराठा युवाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मनोज जरांगे के आंदोलन का नतीजा
गजट जारी होने से पहले मनोज जरांगे ने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी थीं। सबसे अहम मांग यही थी कि मराठा समाज को कुनबी जाति में शामिल किया जाए। सरकार के निर्णय के बाद उन्होंने आमरण अनशन खत्म करने का ऐलान किया। संभावना जताई जा रही है कि वह देर रात तक मुंबई छोड़ देंगे, क्योंकि हाईकोर्ट ने आजाद मैदान को खाली करने का आदेश दिया था।

लंबा संघर्ष, बड़ी जीत
मराठा आरक्षण का सफर आसान नहीं था।

2021 में पिंपलगांव आंदोलन – मनोज जरांगे ने 90 दिनों तक आंदोलन किया।

2023 जालना आंदोलन – अगस्त 2023 में बड़ा अनशन किया और पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।

2023-2025 के बीच सात बार आमरण अनशन – जरांगे ने मराठवाड़ा और मुंबई समेत कई क्षेत्रों में भूख हड़ताल कर अपनी मांग को जीवित रखा।

लगातार संघर्ष और समाज के समर्थन ने ही आज इस ऐतिहासिक फैसले को संभव बनाया है।

सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम मराठा समाज के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। आरक्षण से उन्हें शिक्षा और रोजगार में नई राह मिलेगी। साथ ही यह निर्णय प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करेगा।