Iran Crisis: ईरान में सत्ता के खिलाफ उबाल, सड़कों पर हिंसा, अब तक 217 प्रदर्शनकारियों की मौत; इंटरनेट बंद
Iran Crisis: ईरान में महंगाई से शुरू हुआ विरोध अब सत्ता के खिलाफ हिंसक आंदोलन में बदल गया है। तेहरान समेत कई शहरों में आगजनी, मौतें और इंटरनेट बंद।
ईरान इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। बीते दो हफ्तों में हालात तेजी से बिगड़े हैं और विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रह गए हैं। शुक्रवार रात देश के कई हिस्सों में हालात बेकाबू हो गए, जिसके बाद सरकार ने हालात को संभालने के लिए पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं।
शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियाल की गिरती कीमत के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ इसका रुख पूरी तरह बदल गया। अब प्रदर्शनकारी सीधे सत्ता व्यवस्था और धार्मिक नेतृत्व को निशाने पर ले रहे हैं। आंदोलन की आग अब केवल राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के कई बड़े और छोटे शहर इसकी चपेट में आ चुके हैं।
मौत के आंकड़े डराने वाले, अस्पतालों से सामने आई सच्चाई
तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम उजागर न करने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी के केवल छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई बताई जा रही है। ये आंकड़े सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं।
देशभर में फैली अशांति, कई शहर हिंसा की चपेट में
तेहरान के अलावा मशहद, कोम, इस्फ़हान, मशिरियेह, कजविन, बुशहर और वज्द जैसे शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। कई इलाकों में सड़कों पर आगजनी की गई, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और सुरक्षा बलों के साथ सीधी झड़पें हुईं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
आंदोलन का दायरा बढ़ा, हजारों गिरफ्तार
प्रदर्शन शुरू हुए अब 14 दिन से अधिक हो चुके हैं और इसमें अब तक पांच लाख से ज्यादा लोग शामिल होने की बात सामने आ रही है। देशभर में करीब 400 स्थानों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। झड़पों में तेहरान में 217 प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ 14 सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हो चुकी है, जबकि 2300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सरकारी ढांचा निशाने पर, बैंकों-मस्जिदों में आग
ईरान के लगभग 20 प्रांतों में विद्रोह जैसी स्थिति बन चुकी है और 110 से ज्यादा शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अस्पतालों, बैंकों और मस्जिदों तक को नहीं बख्शा गया। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने बासिज और IRGC कैंप पर हमला किया, 26 बैंकों में लूटपाट की, 25 मस्जिदों में आग लगाई और 10 सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया।
तेहरान के मेयर ने मानी भारी तबाही
तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने सरकारी टीवी पर स्वीकार किया कि राजधानी को भारी नुकसान हुआ है। उनके अनुसार, दंगाइयों ने एक अस्पताल, दो मेडिकल सेंटर, 26 बैंक, 25 मस्जिदें, कानून लागू करने वाली चौकियां और बासिज के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया। इसके अलावा 48 फायर ट्रक, 42 बसें, एम्बुलेंस और 24 अपार्टमेंट को भी नुकसान पहुंचा है।
व्यापारियों से छात्रों तक, आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
घटनाक्रम की शुरुआत 29 दिसंबर 2025 को हुई, जब रियाल की भारी गिरावट के विरोध में सेंट्रल तेहरान में व्यापारियों ने प्रदर्शन शुरू किया। अगले दिन तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी सड़कों पर उतर आए। 2 जनवरी को इलम प्रांत में हथियारों से लैस नकाबपोश लोगों की मौजूदगी ने हालात और ज्यादा गंभीर कर दिए। इसके बाद से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच झड़पें लगातार तेज होती चली गईं।


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