महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की जंग तेज़, मनोज जरांगे पाटील का अनशन; आजाद मैदान से उठी सियासी भूचाल
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आजाद मैदान पर मनोज जरांगे पाटील का अनशन शुरू हो गया है। भाजपा और शिवसेना (उद्धव गुट) आमने-सामने। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनके इस कदम से पूरे राज्य की राजनीति हिल गई है। हजारों की संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई पहुंचे हैं और बारिश के बीच आंदोलन जारी है।
चंद्रकांत पाटील का हमला – 'आम मुंबईकरों को बंधक बनाया जा रहा है'
भाजपा नेता और मंत्री चंद्रकांत पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की अनुमति तो दी गई है, लेकिन इस वजह से आम मुंबईकरों की जिंदगी प्रभावित करना सही नहीं।
उन्होंने साफ कहा कि मराठा समाज को ओबीसी आरक्षण कानूनी रूप से नहीं मिल सकता, क्योंकि इसके लिए वैध प्रमाणपत्र होना ज़रूरी है। पाटील ने शरद पवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वो चार बार मुख्यमंत्री रहे, तब तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण क्यों नहीं दिया?
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मराठा समाज सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं है, उन्हें दलित समाज की तरह छुआछूत या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। असली आरक्षण सिर्फ EWS कोटे में ही संभव है।
'यह आंदोलन राजनीति से प्रेरित' – भाजपा नेता
चंद्रकांत पाटील ने आंदोलन को लेकर कहा कि यह असल में गांव की राजनीति और पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का फायदा उठाने की जुगत है। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि आंदोलन के पीछे राजनीतिक मंशा है और कानूनी तौर पर यह टिक नहीं पाएगा।
संजय राउत का पलटवार – अमित शाह क्यों नहीं मिले आंदोलनकारियों से?
दूसरी ओर शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह मुंबई आए, लेकिन आंदोलनकारियों से मिलने आजाद मैदान नहीं पहुंचे। राउत ने सवाल किया कि जो गृह मंत्री कश्मीर से धारा 370 हटा सकते हैं, वो मराठा समाज के लिए कानून क्यों नहीं बदल सकते? उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह आंदोलन आम लोगों की आवाज है, जिसे भाजपा दबाने की कोशिश कर रही है।
उद्धव ठाकरे का आह्वान – आंदोलनकारियों की सेवा करो, यही मराठी ताकत है
उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों से अपील की कि वे आंदोलनकारियों को भोजन, पानी और आश्रय दें। उन्होंने कहा – ये मराठी समाज की ताकत है और हमें इसे सम्मान देना चाहिए। ठाकरे ने भाजपा नेताओं उदयनराजे और शिवेंद्रराजे पर तंज कसा कि अगर उनमें साहस होता तो वे भी जरांगे पाटील के साथ अनशन पर बैठते। उन्होंने एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस पर भी कटाक्ष किया कि ये नेता जनता से मुंह छुपा रहे हैं और दिल्ली के नेताओं की परछाईं बने घूम रहे हैं।
आंदोलनकारियों की मौतें और किसानों से तुलना
संजय राउत और उद्धव ठाकरे दोनों ने आंदोलन में हुई मौतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जैसे दिल्ली की सीमाओं पर किसानों की मौतें हुईं, उसी तरह महाराष्ट्र में मराठा आंदोलनकारियों की जान जा रही है। राउत ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलनकारियों की बलि ले रही है।


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