क्या ट्रंप पर दबाव बनाने की चाल है पीएम मोदी की चीन यात्रा? जानिए अंदर की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2025 में चीन के शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा सकते हैं। यह यात्रा भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने, अमेरिकी दबाव का जवाब देने और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को प्रदर्शित करने का अहम अवसर बन सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा कर सकते हैं। अगर यह दौरा होता है, तो यह पीएम मोदी की पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद और 2018 के बाद की पहली चीन यात्रा होगी।
अमेरिका को संदेश: भारत किसी एक खेमे में बंधा नहीं
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चरम पर है। भारत का रूस और चीन जैसे देशों से संवाद बढ़ाना यह दर्शाता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है।
'अमेरिका फर्स्ट' बनाम 'इंडिया फर्स्ट'
ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के दबाव में न आने का भारत का यह रुख अमेरिका को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा, न कि किसी विदेशी दबाव को।
SCO समिट में भारत की भागीदारी: बहुपक्षीय कूटनीति को बल
SCO समिट में पीएम मोदी की उपस्थिति भारत की यूरेशिया क्षेत्र में बढ़ती भूमिका और बहुपक्षीय मंचों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह मंच भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, ट्रेड कोऑपरेशन जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने का अवसर देगा।
जापान और चीन की यात्रा साथ-साथ: कूटनीतिक संतुलन का संकेत
इस यात्रा के साथ पीएम मोदी जापान में होने वाले एक अन्य सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत एशियाई कूटनीति में अपनी भागीदारी को गहरा करना चाहता है।
ब्रिक्स समिट के बाद फिर आमने-सामने होंगे मोदी-शी
अक्टूबर 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की औपचारिक बातचीत हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और रिश्तों का आधार आपसी सम्मान और विश्वास पर होना चाहिए।
शी जिनपिंग का जवाब: मतभेद संभालें, सहयोग बढ़ाएं
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अधिक संवाद और सहयोग की वकालत की थी और कहा था कि भारत-चीन को मिलकर विकासशील देशों की एकता का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
सीमा विवाद पर नरमी और ट्रेड टॉक्स: नई दिल्ली में वार्ता से बनी सहमति
जून 2025 में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच हुई वार्ता में एलएसी पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को स्थिर करने पर सहमति बनी थी। दोनों पक्षों ने 2020 से निलंबित हवाई सेवाएं बहाल करने पर भी चर्चा की।
व्यापार और रणनीति: रेयर अर्थ और उर्वरकों पर चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया बीजिंग यात्रा में भारत ने रेयर अर्थ सप्लाई, फर्टिलाइज़र प्रतिबंध, और ट्रेड इनइक्विलिब्रियम जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी। इस बार पीएम की यात्रा इन मसलों पर समाधान की दिशा में अहम मानी जा रही है।
एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह का विरोध
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जून में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर से इनकार कर दिया था क्योंकि उसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र नहीं था, जबकि पाकिस्तानी मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
चीन की बदलती भाषा: TRF को FTO घोषित करने के बाद आया बयान
जब अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा समर्थित The Resistance Front (TRF) को आतंकवादी संगठन घोषित किया, तब चीन ने भी 22 अप्रैल के हमले की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्रीय आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की बात कही।
क्या होगी द्विपक्षीय बैठक? कूटनीतिक हलकों में कयास तेज़
हालांकि अभी तक भारत और चीन की ओर से पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसकी संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं।
भरोसा बहाली की दिशा में बड़ा कदम
गलवान संघर्ष के बाद रिश्तों में आई खटास को सुधारने और बातचीत की बहाली के लिए यह यात्रा एक अहम मोड़ बन सकती है। SCO समिट जैसे मंच पर सीधी बातचीत से सीमा तनाव घटाने की उम्मीद की जा रही है।


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