आरबीआई के नए नियम: EMI लेट होने पर अब नहीं होगी बेइज्जती, रिकवरी एजेंट की गुंडागर्दी पर लगेगी लगाम
आरबीआई के नए ड्राफ्ट नियमों के तहत अब लोन रिकवरी एजेंट धमकी या बदसलूकी नहीं कर सकेंगे। शाम 7 बजे के बाद कॉल पर रोक, प्रमाणित एजेंट अनिवार्य और शिकायत होने पर वसूली प्रक्रिया रुकेगी। जानें Loan Recovery Rules में क्या बड़े बदलाव हुए हैं।
लोन की किस्त भरने में थोड़ी देरी क्या हुई, कई लोगों के लिए सबसे बड़ा डर बैंक के रिकवरी एजेंट बन जाते थे। बार-बार फोन, धमकी भरे शब्द और पड़ोसियों के सामने बेइज्जती—ये शिकायतें आम थीं। लेकिन अब तस्वीर बदलने जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने लोन वसूली की प्रक्रिया को ज्यादा मानवीय और पारदर्शी बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनका मकसद कर्जदार की गरिमा की रक्षा करना है।
मनमानी कॉल और धमकियों पर लगेगी रोक
1 फरवरी को बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोन रिकवरी सिस्टम में सुधार की घोषणा की थी। उसी के बाद ये ड्राफ्ट नियम सामने आए हैं। अब रिकवरी एजेंट न तो धमकी दे सकेंगे, न ही मनमाने समय पर कॉल कर पाएंगे। शाम 7 बजे के बाद कॉल करने पर रोक का प्रस्ताव है, ताकि लोगों की निजी जिंदगी में दखल कम हो।
प्रशिक्षित और प्रमाणित एजेंट ही करेंगे वसूली
पहले कई मामलों में देखा गया कि कोई भी एजेंट बनकर घर पहुंच जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। हर रिकवरी एजेंट को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। बैंक को एजेंट नियुक्त करने से पहले उसका पूरा बैकग्राउंड चेक करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, अधिकृत एजेंटों की सूची बैंक की वेबसाइट और ऐप पर सार्वजनिक करनी होगी, ताकि ग्राहक खुद जांच सकें कि सामने खड़ा व्यक्ति असली है या फर्जी।
त्योहार और पारिवारिक मौकों पर ‘लक्ष्मण रेखा’
त्योहार, शादी या परिवार में किसी शोक के समय वसूली के लिए पहुंच जाना अब संभव नहीं होगा। नए प्रस्तावों के मुताबिक ऐसे संवेदनशील मौकों पर एजेंट संपर्क नहीं कर सकेंगे। अभद्र भाषा, सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाना या बार-बार कॉल करना क्रूर व्यवहार की श्रेणी में आएगा। यानी अब वसूली का तरीका डराने के बजाय समझाने पर आधारित होगा।
शिकायत होने पर रुकेगी वसूली प्रक्रिया
एक और बड़ा बदलाव यह है कि अगर किसी ग्राहक ने एजेंट की शिकायत बैंक में कर दी है और जांच चल रही है, तो तब तक वसूली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी। एजेंट की हर हरकत के लिए बैंक खुद जिम्मेदार होगा। हर नोटिस में शिकायत अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर देना जरूरी होगा, ताकि ग्राहक सीधे अपनी बात रख सकें।
एजेंट बदलने पर पहले से मिलेगी सूचना
अब ‘सरप्राइज विजिट’ का खेल भी खत्म होगा। अगर बैंक आपके केस के लिए एजेंट बदलता है तो इसकी जानकारी एसएमएस या ईमेल से पहले ही देनी होगी। बिना सूचना कोई नया एजेंट आपके दरवाजे पर नहीं पहुंच सकेगा। यदि फिर भी कोई परेशान करता है, तो ग्राहक बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था का सहारा ले सकता है। साफ है कि कर्ज वसूली बैंक का अधिकार है, लेकिन अब यह अधिकार किसी की इज्जत कुचलकर नहीं निभाया जा सकेगा।


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