शराबबंदी को बताया दिखावा, तेजस्वी की साख पर उठाए सवाल — प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

बिहार में कानून-व्यवस्था, शराबबंदी और युवा नेताओं पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला। पढ़ें उनकी बेबाक राय और बिहार चुनाव पर बड़ा बयान।

शराबबंदी को बताया दिखावा, तेजस्वी की साख पर उठाए सवाल — प्रशांत किशोर का बड़ा हमला
Prashant Kishor

राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति और सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने न केवल नीतीश सरकार की शराबबंदी और कानून-व्यवस्था की नाकामी पर सवाल खड़े किए, बल्कि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेताओं पर भी खरी-खरी सुनाई।

'हम शून्य सीट भी जीतें, तैयार हैं' 
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा, हम बिहार की मिट्टी का कर्ज अदा करने आए हैं। यह देखकर दुख होता है कि बिहार आज भी पिछड़ा हुआ है। हम नतीजों से नहीं डरते — चाहे हमें 10 सीटें मिलें या शून्य, इसके लिए तैयार हैं। हमारा मकसद सत्ता नहीं, बदलाव है।

'पुलिस बालू माफिया और शराब की डिलिवरी में व्यस्त'
बिहार में अपराध और पुलिस तंत्र की स्थिति पर पीके ने आरोप लगाया कि प्रशासन जनता की सेवा के बजाय माफियाओं की सेवा में लगा हुआ है। पूरा पुलिस प्रशासन बालू माफिया को बचाने में और शराब की होम डिलिवरी कराने में लगा है। शराबबंदी केवल कागजों पर है। दुकानें भले बंद हों, मगर शराब हर गली मोहल्ले में होम डिलिवरी हो रही है। सरकार को इससे हर साल कम से कम 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

'शराबबंदी कानून नहीं, सामाजिक आंदोलन होना चाहिए' 
शराबबंदी पर गांधी जी के पोस्टर के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर बोले, गांधी जी ने कब कहा था कि शराबबंदी के लिए राज्यों में कानून बनाए जाएं? शराबबंदी एक सामाजिक प्रयास है, न कि जबरदस्ती का कानून। जैसे शाकाहारी होना अच्छी बात है लेकिन मांसाहार पर कानून बनाना गलत होगा, वैसे ही शराबबंदी को भी कानून से नहीं थोपना चाहिए।

तेजस्वी और चिराग पर दो टूक
बिहार की राजनीति में युवा चेहरों की भूमिका पर बोलते हुए पीके ने तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के बारे में भी अपनी राय दी। तेजस्वी यादव की पहचान फिलहाल सिर्फ लालू यादव के बेटे के रूप में है। आगे नेता बनेंगे या नहीं, यह जनता तय करेगी। चिराग पासवान खुद को बिहार का नेता कहते हैं, लेकिन वो न तो बिहार में रहते हैं और न बिहार की राजनीति करते हैं।

मतदाता सूची पर सवाल — तो क्या लोकसभा चुनाव गलत थे?
चुनाव आयोग की मतदाता सूची के स्पेशल रिवीजन को भी प्रशांत किशोर ने गलत बताया। उन्होंने कहा, अगर चुनाव आयोग कहता है कि लाखों मृत लोग और नेपाल-बांग्लादेश के लोग वोटर लिस्ट में आ गए, तो यह मानना होगा कि 2024 के लोकसभा चुनाव भी इसी गलत सूची से कराए गए। या आयोग बताए कि इतने लोग लोकसभा चुनाव के बाद अचानक कहां से आ गए।