Bihar Voter List SIR विवाद: 12 ज़िंदा लोगों को 'मृत' दिखाया, 65 लाख नाम लिस्ट से बाहर – कपिल सिब्बल का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दावा किया कि 12 जीवित लोगों को मृत दिखाया गया और 65 लाख नाम लिस्ट से हटाए गए। चुनाव आयोग ने इसे ‘छोटी गलतियां’ बताया। जानें पूरा मामला।

Bihar Voter List SIR विवाद: 12 ज़िंदा लोगों को 'मृत' दिखाया, 65 लाख नाम लिस्ट से बाहर – कपिल सिब्बल का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा
Supreme Court

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में गंभीर त्रुटियां हैं — यहां तक कि 12 जीवित लोगों को ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है और 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हैं। इस मामले ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

ड्राफ्ट लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी का दावा
कपिल सिब्बल ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच को बताया कि इस महीने जारी पहली ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई चौंकाने वाली गलतियां हैं।
- 12 जीवित व्यक्तियों को मृत के रूप में दर्ज किया गया।
- 65 लाख नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए।

उनका कहना था कि हर बूथ पर गड़बड़ी हो रही है, ऐसे में हम पीड़ितों का पता कैसे लगाएंगे।

चुनाव आयोग का पक्ष – ‘छोटी गलतियां संभव’
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि इतनी विस्तृत प्रक्रिया में छोटी गलतियां संभव हैं। अंतिम सूची जारी होने से पहले सुधार किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नई याचिकाएं और दस्तावेज सोमवार को दाखिल हुए हैं, जिनका जवाब अभी नहीं दिया जा सका है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी – ‘पीड़ितों की सूची दें’
सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि जिन लोगों को गलत तरीके से मृत दिखाया गया है, उनकी सूची दी जाए ताकि चुनाव आयोग से जवाब लिया जा सके। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा – आप SIR की शुरुआत पर ही सवाल उठा रहे हैं। 

65 लाख मतदाताओं के नाम बाहर – गंभीर मुद्दा
एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट को याद दिलाया कि पहले कोर्ट ने कहा था कि अगर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो हस्तक्षेप होगा। 65 लाख लोगों का नाम बाहर होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।

कपिल सिब्बल का कहना है कि किसी का नागरिक और क्षेत्र का निवासी होना ही वोटर बनने के लिए पर्याप्त है और आधार कार्ड में दर्ज पता इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत है।

कोर्ट ने कहा कि स्थिति की वास्तविकता बहस के दौरान स्पष्ट होगी। जरूरत पड़ने पर नई दाखिल याचिकाओं और दस्तावेजों पर जवाब देने के लिए समय दिया जाएगा।