समोसा है पर स्टैंडर्ड नहीं! संसद में बोले रविकिशन – कहीं बड़ा, कहीं महंगा... कोई कानून तो बना लो
सांसद रविकिशन ने संसद में खाने की गुणवत्ता और दामों पर उठाई आवाज, समोसे से लेकर दाल तक की कीमतों पर राष्ट्रीय कानून की मांग की।
लोकसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान गोरखपुर से बीजेपी सांसद रविकिशन ने खाने-पीने की चीज़ों की गुणवत्ता, मात्रा और कीमत को लेकर एक बेहद अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों ढाबे और होटल हैं, लेकिन वहां बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर कोई मानकीकरण (standardization) नहीं है।
उन्होंने समोसे का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि एक ही आइटम – समोसा – कहीं 10 रुपये का है, कहीं 40 रुपये का। कहीं छोटा, कहीं बड़ा। किसी जगह चटनी में स्वाद है, कहीं सिर्फ नाम भर की।
रविकिशन का संसद में बयान – फाइव स्टार होटल में वही समोसा 200 रुपये में मिल जाता है, लेकिन गोरखपुर में कोई उसे 15 रुपये में देता है। चांदनी चौक में कोई उसे 10 में बेचता है। कोई कटोरी भर देता है दाल की, कोई आधी। ये आज तक हमें समझ नहीं आया!
सांसद की मांग – खाद्य मानकीकरण पर बने राष्ट्रीय कानून
रविकिशन ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि ढाबों, सामान्य होटलों और रेस्टोरेंट्स से लेकर फाइव स्टार होटलों तक, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, मात्रा और मूल्य को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर का स्पष्ट कानून बनाया जाए। इससे उपभोक्ताओं को उचित मूल्य, सही मात्रा और साफ-सुथरा, सुरक्षित खाना मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई क्षेत्रों में बदलाव लाए हैं, लेकिन फूड इंडस्ट्री अब तक अनरेगुलेटेड है। अब समय आ गया है कि इस सेक्टर में भी पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।


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