शशि थरूर ने कांग्रेस को दी नसीहत: इंदिरा गांधी की इमरजेंसी याद कर कहा- आज का भारत 1975 नहीं है
शशि थरूर ने कांग्रेस को इमरजेंसी के दमनकारी दौर की याद दिलाई। बोले- आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी नेतृत्व के साथ शह-मात के खेल में हैं। इस बार उन्होंने ऐसा मुद्दा उठा दिया जिससे पार्टी असहज हो गई। उन्होंने अपने लेख में 1975 की इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस की दमनकारी नीतियों की तीखी आलोचना की।
थरूर ने लिखा — आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। इंदिरा गांधी का सत्तावादी रवैया देश को भय और दमन में धकेल चुका था। इमरजेंसी के दौरान हिरासत में यातनाएं दी गईं, न्यायेतर हत्याएं हुईं और लोकतंत्र को कुचला गया।
क्यों बढ़ी पार्टी के भीतर तल्ख़ी?
थरूर का यह लेख ऐसे समय आया है, जब उनके और कांग्रेस नेतृत्व के बीच शीतयुद्ध जैसा माहौल है। वह लगातार कई मुद्दों पर भाजपा सरकार के कदमों की तारीफ़ कर चुके हैं — फिर चाहे वो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर हो या पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक मुहिम।
मोदी सरकार की सराहना करने पर कांग्रेस प्रवक्ताओं ने उन पर सवाल उठाए, लेकिन थरूर ने पलटकर पार्टी प्रवक्ताओं को भी आड़े हाथों लिया।
इमरजेंसी में ‘लोकतंत्र का गला घोंटा’
शशि थरूर ने लेख में लिखा कि जून 1975 से मार्च 1977 तक देश इंदिरा गांधी के सत्तावादी रवैये का गवाह बना। नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में ठूंसा गया और मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई।
उन्होंने लिखा — न्यायपालिका तक दबाव में झुक गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी नागरिक स्वतंत्रता के निलंबन पर मुहर लगा दी। पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम लोगों को जेल में बंद कर दिया गया। संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई गईं।
संजय गांधी पर भी निशाना
थरूर ने इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के रोल को ‘बेइंतहा ज़ुल्म’ बताते हुए लिखा कि इमरजेंसी के दौरान गरीबों पर जबरन नसबंदी जैसे अमानवीय अभियान चलाए गए। उन्होंने कहा — बेलगाम शक्तियां अत्याचारी हो गई थीं, जिन्हें बाद में ‘दुर्भाग्यपूर्ण ज्यादती’ कहकर टाल दिया गया।
आज का भारत अलग है: थरूर
अपने लेख के अंत में शशि थरूर ने ज़ोर देकर कहा कि आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। अब लोग लोकतंत्र की ताक़त समझते हैं और उसका बचाव करना जानते हैं।


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