पुणे में सांप्रदायिक तनाव: शिवाजी महाराज की प्रतिमा खंडित होने के बाद यवत में हिंसा, मस्जिद पर पथराव

पुणे के यवत में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा तोड़े जाने के बाद तनाव। मस्जिद पर पथराव से हालात बिगड़े, गांव बंद और सुरक्षा सख्त।

पुणे में सांप्रदायिक तनाव: शिवाजी महाराज की प्रतिमा खंडित होने के बाद यवत में हिंसा, मस्जिद पर पथराव
Violence in Pune

महाराष्ट्र के पुणे जिले में सांप्रदायिक तनाव ने एक बार फिर सिर उठा लिया है। दौंड तालुका के यवत रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में 26 जुलाई 2025 को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा खंडित कर दी गई। इस घटना के बाद से इलाके में आक्रोश और तनाव का माहौल बना हुआ है।

हिंदू संगठनों में उबाल, गांव पूरी तरह बंद
प्रतिमा तोड़े जाने की खबर फैलते ही स्थानीय हिंदू संगठनों और ग्रामीणों में भारी रोष देखा गया। 27 जुलाई को बीजेपी विधायक गोपीचंद पडळकर ने यवत में एक बैठक की और अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मोर्चा निकाला। इसके बाद आज, 1 अगस्त को यवत की एक मस्जिद पर पथराव की घटना सामने आई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

प्रदर्शनकारियों ने यवत गांव को पूरी तरह बंद कर दिया और सरकारी दफ्तरों से लेकर बाजार तक सबकुछ ठप रहा। “सकल हिंदू समाज” ने इस घटना को जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश बताया है।

मस्जिद पर पथराव के बाद हालात तनावपूर्ण, पुलिस तैनात
आज शुक्रवार को मस्जिद पर हुए पथराव से इलाके में भारी तनाव पैदा हो गया है। स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और पूरे क्षेत्र में अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि घटना की निष्पक्ष जांच की जा रही है।

क्या बोले संगठन और ग्रामीण?
हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह घटना "जानबूझकर" की गई ताकि दो समुदायों के बीच वैमनस्य और हिंसा को बढ़ावा दिया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक राजा नहीं, बल्कि जननायक हैं, जिनकी प्रतिमा तोड़ना सांस्कृतिक और सामाजिक अपमान है। लोग दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं।