WhatsApp पर आने वाला ‘Strict Account Settings’ फीचर: फर्जी कॉल्स और साइबर ठगी से मिलेगा पक्का बचाव
WhatsApp जल्द ‘Strict Account Settings’ फीचर लॉन्च करने वाला है, जो फर्जी कॉल्स, अनजान मैसेज और साइबर अटैक से यूजर्स की सुरक्षा करेगा।
डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेज़ी से साइबर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। खासकर WhatsApp जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर फर्जी कॉल्स, संदिग्ध लिंक और ठगों द्वारा भेजे जाने वाले धोखाधड़ी वाले मैसेज रोज़ाना लाखों यूजर्स को परेशान करते हैं। अब मेटा (Meta) इस समस्या का स्थायी हल ढूंढने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अपने इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp के लिए एक नया सिक्योरिटी फीचर ‘Strict Account Settings’ तैयार कर रही है, जो यूजर्स को अनजान नंबरों से आने वाले कॉल्स और मैसेज से बचाने में मदद करेगा।
साइबर ठगी के बढ़ते खतरे
बीते कुछ वर्षों में भारत समेत दुनिया भर में WhatsApp यूजर्स को टारगेट करने वाले साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़े हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर OTP मांगा जाता है, तो कभी किसी फर्जी लिंक पर क्लिक करवाकर डेटा चुराया जाता है। कई बार अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल्स या ग्रुप इनवाइट्स के जरिए भी यूजर्स की निजी जानकारी हैक कर ली जाती है।
ऐसे में यह सवाल उठने लगा था कि मेटा अपनी सबसे लोकप्रिय चैटिंग ऐप को किस तरह से सुरक्षित बनाएगी। इसी का जवाब अब ‘Strict Account Settings’ फीचर के रूप में मिल सकता है।
क्या है ‘Strict Account Settings’ फीचर?
WABetaInfo की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp ने एंड्रॉइड बीटा वर्जन 2.25.33.4 में इस फीचर का परीक्षण शुरू कर दिया है। बीटा वर्जन में यह फीचर यूजर्स के अकाउंट की सिक्योरिटी को “सख्त मोड” में बदल देता है। इसका मकसद है—आपके WhatsApp पर किसी भी अजनबी या संदिग्ध नंबर से आने वाली गतिविधियों को रोकना।
इस फीचर के ज़रिए यूजर्स को यह तय करने का विकल्प मिलेगा कि कौन उन्हें कॉल या मैसेज कर सकता है, कौन मीडिया भेज सकता है और कौन ग्रुप में ऐड कर सकता है। यानी, हर गतिविधि पर यूजर का पूरा नियंत्रण होगा।
कौन-कौन से ऑप्शन मिलेंगे?
WABetaInfo द्वारा जारी स्क्रीनशॉट में इस नए मोड में कई सिक्योरिटी विकल्प दिखाए गए हैं, जैसे—
Messages & Calls: अजनबी नंबरों से आने वाले कॉल्स और मैसेज को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सकेगा।
Media & Attachments: किसी अनजान नंबर से आने वाली फोटो, वीडियो या डॉक्यूमेंट्स को ऑटो डाउनलोड होने से रोका जा सकेगा।
Disable Link Preview: संदिग्ध वेबसाइट लिंक का प्रीव्यू अपने आप बंद रहेगा ताकि गलती से किसी हानिकारक लिंक पर क्लिक न हो।
Silence Unknown Calls: यह ऑप्शन पहले से मौजूद है, लेकिन नए मोड में इसे और उन्नत रूप में शामिल किया गया है ताकि कॉल्स पूरी तरह ब्लॉक की जा सकें।
Two-Step Verification: अकाउंट में लॉगिन करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा स्तर के रूप में इसे और सख्त बनाया गया है।
Group Controls: कोई भी यूजर आपको बिना अनुमति के ग्रुप में नहीं जोड़ सकेगा।
इन सेटिंग्स को यूजर अपनी सुविधा के हिसाब से ऑन या ऑफ कर सकेगा, जिससे ऐप का उपयोग पूरी तरह व्यक्तिगत नियंत्रण में रहेगा।
डिजिटल सेफ्टी में अहम कदम
यह फीचर मेटा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें कंपनी यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दे रही है। हाल ही में WhatsApp ने “साइलेंस अननोन कॉल्स” और “प्राइवेट ऑडियंस सिलेक्शन” जैसे फीचर्स जोड़े थे, जिससे अनचाहे कॉल्स और ग्रुप मैसेज से राहत मिली। लेकिन “Strict Account Settings” को इससे एक कदम आगे माना जा रहा है क्योंकि यह केवल कॉल या मैसेज नहीं, बल्कि पूरी कम्युनिकेशन प्रक्रिया को सुरक्षित बनाता है।
आज जब फिशिंग अटैक, स्पैम लिंक्स और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामान्य हो चुकी हैं, तब WhatsApp का यह कदम यूजर्स को डिजिटल आत्मनिर्भरता (Digital Self-Protection) की दिशा में ले जाएगा।
कब तक मिलेगा यह फीचर?
फिलहाल यह फीचर बीटा टेस्टिंग स्टेज में है, और इसे एंड्रॉइड यूजर्स के लिए सीमित तौर पर जारी किया गया है। मेटा ने इसके पब्लिक लॉन्च को लेकर अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन अनुमान है कि अगले कुछ महीनों में इसे ग्लोबली रोल आउट किया जा सकता है। iOS यूजर्स को यह अपडेट इसके बाद मिलेगा।
कंपनी चाहती है कि इसे लागू करने से पहले पर्याप्त फीडबैक मिल जाए ताकि फीचर यूजर-फ्रेंडली बने और किसी तरह की तकनीकी समस्या न रहे।
क्यों जरूरी है यह अपडेट?
भारत जैसे देश में जहां WhatsApp के 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं, वहां फर्जी कॉल्स और ठगी वाले मैसेज का खतरा बहुत बड़ा है। साइबर क्राइम सेल्स की रिपोर्ट बताती हैं कि कई ठग WhatsApp कॉल्स के ज़रिए लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं या स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड कराकर अकाउंट खाली करवा देते हैं।
इस फीचर के आने के बाद ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना आसान होगा, क्योंकि अज्ञात नंबरों से संपर्क की संभावना ही खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, यह फीचर सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) जैसे जटिल साइबर हमलों को भी रोकने में मदद करेगा।


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